Monday, February 6, 2017

इश्क की राहों पे चलकर...


इश्क की राहों पे चलकर पाया क्या
सोच कर यह तू कभी पछताया क्या

इश्क में जीना ओ मरना आया क्या
सामने थी मौत तब घबराया क्या

जब हुआ दीदार तुझको यार का
 दिल की अपनी बात तू कह पाया क्या

बादलों की ओट से झांका जो चांद
नजरों से नजरें मिलीं शरमाया क्या

इश्क को कहते हैं दरिया आग का
दो कदम भी आग में चल पाया क्या

जब चढ़ाया सूली पे जल्लाद ने
गीत उसके नाम तू गा पाया क्या

---  शिवशंकर

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